Gold-Silver Crash: सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए शुक्रवार राहत भरा दिन साबित हुआ। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। सवाल यह है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है या कीमतों में अभी और नरमी देखने को मिल सकती है? बाजारों में भी गिरावट देश के प्रमुख बाजारों में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है। 24 कैरेट सोने का भाव कई शहरों में 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमतों में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे यह कई हजार रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। सोना अपने हालिया स्तरों से फिसलकर नीचे आ गया, जबकि चांदी में और तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही दोनों धातुओं में कमजोरी दिखाई दी और कारोबार के दौरान यह दबाव लगातार बढ़ता गया। क्या है गिरावट का कारण विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है, जिसके चलते निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग कमजोर हुई है। इसके अलावा शेयर बाजारों में मजबूती और कुछ आर्थिक संकेतकों में सुधार ने भी सोने-चांदी पर दबाव बढ़ाया है। सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय में भी कमजोर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी कमजोर रुख के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। अमेरिकी आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और डॉलर की स्थिति का असर भी कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और बड़े फंड्स की बिकवाली ने भी गिरावट को तेज किया। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने और चांदी की कीमतें अब अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना मुश्किल है। कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और अल्पकाल में दबाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या है इसका भविष्य फिर भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर के रूप में देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, बढ़ते सरकारी कर्ज और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोना खरीदने जैसे कारक भविष्य में फिर से सोने-चांदी को समर्थन दे सकते हैं। ऐसे में जो निवेशक लंबे समय के नजरिए से सोच रहे हैं, वे मौजूदा गिरावट को चरणबद्ध निवेश के अवसर के रूप में देख सकते हैं। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों के रुख पर टिकी हुई है। ये भी पढ़ें: सोना खरीदारों के लिए बड़ी राहत! गोल्ड 1.50 लाख से नीचे फिसला, चांदी में भी भारी गिरावट